चलो आज फिर थोडा मुस्कुराया जाये,
बिना माचिस के कुछ लोगो को जलाया जाये
जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं,
मै खुद को नही देखता औरो की नजर से….
बस इतनी सी बात पर हमारा परिचय तमाम होता है,
हम उस रास्ते नही जाते जो रास्ता आम होता है…
ये मत समझ कि तेरे काबिल नहीं हैं हम,
तड़प रहे हैं वो जिसे हासिल नहीं हैं हम
आग लगाना मेरी फितरत में नही है,
मेरी सादगी से लोग जलें तो मेरा क्या कसूर.
लोग 🙍मुझे अपने 👄होंठों से लगाए हुए हैं,
मेरी शोहरत किसी के नाम की मोहताज नहीं.
ख़त्म हो भी तो कैसे, ये मंजिलो की आरजू,
ये रास्ते है के रुकते नहीं, और इक हम के झुकते नही.
हथियार तो सिर्फ शौक के लिए रखा करते है,
वरना किसी के मन में खौंफ पैदा करने के लिए तो बस नाम ही काफी है
ऐसा नही है कि मुझमे कोई 'ऐब' नही है,
पर सच कहता हूँ मुझमें कोई 'फरेब' नहीं है
नमक स्वाद अनुसार,
अकड औकात अनुसार
शब्द पहचान बनें मेरी तो बेहतर है,
चेहरे का क्या है,
वो मेरे साथ ही चला जाएगा एक 🌄दिन
अंदाज़ कुछ अलग ही मेरे सोचने का है,
सब को मंज़िल का है शौख 🙍मुझे रास्ते का है
तेरी 👨🏼❤️👨🏼मोहब्बत को कभी खेल नही समजा,
वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….
दादागिरी तो हम मरने के बाद भी करेंगे,
लोग पैदल चलेंगे और हम कंधो पर
🙍मुझे एक ने पूछा "कहा रहते हो"
मैंने कहा "औकात मे"
साले ने फिर पूछा "कब तक"
🙅मैंने कहा "सामने वाला रहे तब तक".





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