जिस्म से रोह तक जाए तो हकीकत है इश्क
और रोह से रोह तक जाए तो इबादत है इश्क
मंजिल भी उसी किठी राष्ट्र भी उसी का था
एक 👩🏼🔧हम ही अकेले द कफिला भी उसी का था
साथ साथ चलने की कसम भी उसी थी
और रास्ता बदलने का फैसला भी उसी का था
खू कर 👩🏼🔧हमें फिर ना पा सकोगे
जहां 👩🏼🔧हम होंगे वहां ना आ सकोगे
हर पल 👩🏼🔧हमें महसूस तो करोगे लेकिन
पर 👩🏼🔧हम होंगे वहां जहां से
👩🏼🔧हमें फिर भुला ना सकोगे
रोज़ 👩🎨तुझे ये सोच कर याद कर लेते हैं
की आज के बाद 👩🎨तुझे याद नहीं करेंगे
रख लो जज़ार मैं कहता तेरा दिन रात इसी पे मरता हूं
जब तक ये सासीन चलती रहे मैं 👩🎨तुझे 👨🏼❤️💋👨🏼मोहब्बत करता रहूं
पागल नहीं द जो 👩🏼🔧हम तेरी हर बात मान लेते थे
बस तेरे चाहरे पर मुश्किल से जायदा कुछ सोचा नहीं
अच्छा करते हैं वो लोग जो मोहब्बत का इंतजार नहीं करते
खामोशी से मर जाते हैं मगर किसी को बदनाम नहीं करते
जरा सी गलती पर ना छोड़ो किसी अपना का साथ
क्यू की जिंदगी बीट जाती है किसी को अपना बनाने में
अगर किसी से प्यार करो तो तर्जुबा कार्लो
ये रोग ऐसा जिसकी कोई दावा नहीं होती
ये इश्क है जनाब यहां इंसान निखारता भी कमाल का है
और जब बिखरता है तो बिखरता भी कमाल है
ना कोई किस से दूर होता है ना किसी के करिब होता है
प्यार खुद चल कर आता है जब कोई किसी के नसीब मैं होता है



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